Contact Information

Delhi

We Are Available 24/ 7. Call Now.

आइये आज जानते हैं कोलकाता को जलने से बचाने वाले पद्मश्री बिपिन गनात्रा जी के बारे में…

आपकी नज़रों में महान व्यक्तित्व की क्या परिभाषा है? आपसे अगर पूछा जाये तो इसे किस तरह परिभाषित करेंगे? महानता की एक अनूठी मिसाल जो वर्षों से लोगों के भले के लिए निःस्वार्थ काम रहे हैं। बिना खुद की परवाह किए। बिना समय की सुई को देखे। बिना किसी सवाल और स्वार्थ के अपनी सेवा देने के लिए तत्पर रहते हैं।

बिपिन गनात्रा की कहानी

हम बात कर रहे हैं, कोलकाता के रहने वाले बिपिन गनत्रा की। जो पिछले 43 सालों से एक फायरफाइटर के रूप में दूसरों के लिए जी रहे हैं। उन्होंने अपना जीवन पूरी तरह सामाजिक सेवा में समर्पित कर दिया है।

कहते हैं कि जब इंसान के इरादे मजबूत और मन में दृढ संकल्प हो तो वह कुछ भी कर सकता है। यहां तक कि वह अपनी जान की परवाह किए बिना आग से भी खेल सकता है। यही काम पिछले 43 सालों से आग से खेल रहे बिपिन गनत्रा इसका एक बड़ा उदाहरण हैं। अब तक उन्होंने लगभग हजारों लोगों की आग से जान बचाई है।

उनका जीवन किसी मिसाल से कम नहीं है। फायरफाइटर न होते हुए भी वह यह जोखिम भरा काम वर्षों से ख़ुशी-ख़ुशी कर रहे हैं। लगभग 62 साल के बिपिन के हौसलों पर उनकी उम्र का की असर नहीं है। आज भी उम्र के इस पड़ाव में उनके इरादे उतने ही बुलंद हैं, जितने की पहले हुआ करते थे।

बिपिन गनत्रा ने सातवीं कक्षा के बाद अपनी पढा़ई छोड़ दी थी। वे अपने भाई की मौत से काफी दुखी थे। अपनों को खोने का दर्द वो अच्छे से समझते हैं और चाहते है की कभी किसी को इस पीड़ा से न गुजरना पड़े।

कैसे मिलती है सूचना?

गनत्रा हमेशा टीवी और रेडियो से अपडेट रहते हैं। उन्हें जब भी कोई आग की घटना की सूचना मिलती है वे सबसे पहले फायर ब्रिगेड को कॉल करते हैं और साथ ही साथ खुद भी पहुंच जाते हैं। बिना किसी ट्रेनिंग के वह एक पेशेवर फायरफाइटर की तरह लोगों की मदद करते हैं, इसके बावजूद के वे हृदय रोगी है। बिपिन ने अपनी लाइफ में जूट बेचने से लेकर बिजली वाले तक का काम किया है।

पद्मश्री से हुए सम्मानित

कोलकाता में कहीं भी आग लगी हो तो बिपिन गनात्रा सब छोड़ एक उम्मीद की तरह पहली फुर्सत में वहां पहुंचते हैं। इसलिए लोग उन्हें सिटी ऑफ फायर कहकर भी बुलाते हैं। उन्हें अपने इस नेक काम के लिए राज्य स्तर पर कई प्रमाण पत्र, पुरस्कार और भारत सरकार द्वारा पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया है।

बिना किसी अधिकारिक प्रशिक्षण के अपनी जान जोखिम में डालकर समाज के लिए आगे आना आसान नहीं होता है। अपने बड़े भाई को खोने का दुःख सहन करने वाले बिपिन, ये दुःख सहते हुए किसी और को नहीं देखना चाहते हैं। ऐसी ही प्रेरणादायी सकारात्मक सोच महान लोगों को जन्म देती है। महानता कोई जन्मजात विशेषता नहीं है। हम अपनी सोच और कर्म से महान बनते हैं।

खुद से जो बाहर निकला, उसको सारा संसार मिला

महान होने के लिए आपको बड़े-बड़े काम करने की ज़रूरत नहीं है। इसके लिए बस अपने छोटे-से काम को बड़प्पन के साथ करने की ज़रूरत है। महानता कभी भी खुद के लाभ के लिए काम करने से हासिल नहीं होती। ये तभी मिलती है, जब आप खुद से बाहर निकलते हैं और दुनिया के लिए जीते हैं। खुद के लिए जीने वाले को सिर्फ घर-द्वार और परिवार मिला लेकिन जो खुद से बाहर निकला उसको सारा संसार मिला

वीडियो

Share:

administrator

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *