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दोस्तों, आज हम जानेंगे युवा अधिकारी मिंटू लाल की कहानी, जिन्होंने अपने दम पर अपने सपने पूरे किए और अपने जीवन की हर मुश्किल को धराशाही कर दिया। मिंटू की कहानी हर उस युवा में अद्भुत ऊर्जा व प्रेरणा का संचार करती है जो इस आधुनिक युग में भी संसाधनों की कमी की मार झेल रहा है। तो दोस्तों आइये जानते हैं मिंटू लाल की कहानी, जिनके जीवन में अनगिनत परेशानियों ने बसेरा बनाया हुआ था। वो मिंटू जो कभी बचपन में भैंस चराते थे, उन्होंने कैसे एक सरकारी स्कूल में पढ़ाई कर अनगिनत उपलब्धियों को पाया। कैसे वो एक पटवारी से देखते – देखते एक IRS अधिकारी बन गये। हमें यकीन है मिंटू लाल के जीवन के संघर्षों से भरी इस कहानी के सफर में आप प्रेरित भी होंगे और आनंदित भी।

प्रारम्भिक शिक्षा

राजस्थान स्थित दौसा जिले के धरणवास गांव के मिंटू लाल के माता-पिता पढ़े लिखे नहीं थे, वो कभी स्कूल भी नहीं गए थे। जिसके चलते बचपन में मिंटू लाल के मन में भी स्कूल जाने के डर ने घर बना लिया था लगभग 6 वर्ष पूर्ण करने के बाद मिंटू पहली बार स्कूल गये थे और वो भी अपनी माँ से 2 दिन तक लगातार पिटाई खाने के बाद, वो भी एक समय था जब उनकी माँ उन्हें पीटते हुए स्कूल के दरवाजे तक छोड़ कर आती थी। स्कूल जाने के पहले मिंटू लाल की ज़िन्दगी उनके हिसाब से बड़ी ही रोमांचक थी वो माता या पिता के साथ भैंस चराते थे दिन भर मौज मस्ती बस यही काम था।

मिंटू लाल ने अपनी दसवीं तक की पढ़ाई गाँव के ही सरकारी स्कूल में की लेकिन उन्हें स्कूल के दौरान भी कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। क्योंकि उनके घर में बिजली नहीं होती थी तो उनके पास केवल 2 ही विकल्प थे या तो चिमनी जलाकर पढ़ें या घर से थोड़ी दूर पपलाज माता के मंदिर में, जहाँ रौशनी रहती थी। मिंटू रोजाना प्रतिदिन देर रात तक वहां पढ़ाई किया करते थे।

12वीं में ही बन गए पटवारी

वो कहते है ना जिसमें कुछ पाने का जूनून और कुछ कर गुजरने की चाह होती है उसे परेशानियाँ, विपरीत परिस्थियाँ और कितनी भी बड़ी मुसीबत हो सफल होने से रोक नहीं सकती और इस सफलता की दिशा में मिंटू की पहली सफलता की सीढ़ी थी पटवारी की नौकरी। मिंटू लाल को 12वीं के बाद अपनी तेज़ बुद्धि और मेहनत के बलबूते पटवारी की नौकरी मिल गई थी। लेकिन मिंटू पटवारी की नौकरी के साथ-साथ अपने प्रयासों में लगे रहे और NET-JRF की परीक्षा पास की। अपने जीवन की दूसरी सफलता के बाद गाँव के मिंटू लाल में जोश व आत्म विश्वास का विस्तार हुआ और उनका मनोबल भी बढ़ गया

जहाँ तक सिविल सर्विसेस में आने की बात है, मिंटू ने माध्यमिक कक्षाओं में ही तय कर लिया था कि उन्हें एक सिविल सेवक बनना है और हाल ही में मिली सफलता ने मिंटू की काबिलियत को एक नई चुनौती के लिए दृढ किया और उन्होंने IAS की परीक्षा देने की हिम्मत जुटाई।

कॉलेज गए बिना ही बन गए अधिकारी

बचपन से ही मन में पल रहे अपने सपने को पाने के लिए मिंटू शुरू से ही अपने बड़े भाई की को देखते हुए अखबार पढ़ने लगे थे और समाचार पत्रों में ही उन्हें प्रशासनिक अधिकारियों के दौरों के बारे में पढ़ने को मिलता था मिंटू लाल बचपन में जितने चंचल थे बड़े होते हुए उतने ही समझदार और होनहार होते गये। वो बताते हैं उन्हें आज भी अच्छे से याद है कि IAS अधिकारी डॉ. जोगाराम जांगिड़ जब दौसा के कलेक्टर बनकर आये थे तो उस वक़्त वो उनसे काफी प्रभावित हुए थे। लेकिन परिवार के आर्थिक हालात ठीक नहीं थे इसलिए वो जल्द से जल्द नौकरी पाकर परिवार की मदद करना चाहते थे। जिसके लिए लिए उन्होंने 12वीं के बाद ही पटवारी की नौकरी भी पा ली थी।

जिसके चलते वो औपचारिक रूप से किसी कॉलेज या विश्वविद्यालय में जाकर पढ़ाई नहीं कर पाए। उन्होंने प्राइवेट फॉर्म भरकर B.A. तथा M.A. की डिग्री ली और नौकरी के साथ-साथ अपनी पढ़ाई भी जारी रखी। मिंटू लाल के दृढ इरादों ने उनके सपनों पर मजबूरी का पूर्ण विराम कभी नहीं लगने दिया।

दोस्तों ने दिया साथ

वो अपने लक्ष्य को पाने के लिए दिल्ली आकर तैयारी करना चाहते थे लेकिन इसके लिए उन्हें पैसों की जरूरत थी, जो उस वक़्त उनके पास नहीं थे। ऐसे मुश्किल समय पर मिंटू लाल के दोस्तों ने उनका साथ दिया और फिर क्या था मिंटू आर्थिक सहयोग मिलते ही दिल्ली आ गये। मिंटू बताते है उस समय कई लोगों ने उन्हें हिदायत दी थी कि पटवारी की नौकरी ही कर लो, अपने इस छोटे से गाँव से आज तक कोई भी इस कठिन परीक्षा में सफल नहीं हुआ। अच्छी खासी नौकरी लगी है क्यों अपने समय और धन की बर्बादी करते हो? लेकिन मिंटू को अपने आप पर अपनी काबिलियत पर पूरा विश्वास था और उसी दृढ इरादे के साथ मिंटू लाल ने IAS की तैयारी शुरू की।

“इंटरव्यू में लिए जाते हैं पैसे”

पूरी एक साल की मेहनत के बाद मिंटू लाल सिविल सेवा परीक्षा में शामिल हुए और पहले ही प्रयास में इंटरव्यू तक पहुंचे। मिंटू लाल बताते हैं कि वो उनकी जिंदगी के अद्भुत क्षण थे क्योंकि उन्होंने कभी जीवन में नहीं सोचा था कि वो उनके पहले प्रयास में यूपीएससी के इंटरव्यू तक पहुंच जाएंगे। मिंटू बताते हैं उस समय कई लोगों ने मेरे माता-पिता से कहा कि इंटरव्यू में तो पैसे लिए जाते हैं। सब कुछ पहले से तय होता है। आप लोग भी अपने बेटे को पैसे देकर भेजना।

इस भ्रम को ख़त्म करने के लिए कुछ दोस्तों और शिक्षकों की मदद से मिंटू लाल ने अपने परेशान माता पिता को समझाया कि इस परीक्षा में सब कुछ ईमानदारी से होता है। यदि सबकुछ सही रहा और मैंने सबकुछ ठीक किया तो चयन हो जाएगा और अगर नहीं भी हुआ तो दुबारा और अधिक मेहनत करूंगा।

पहली बार रहे असफल

पहली कोशिश में मिंटू लाल को सफलता नहीं मिली लेकिन उनका विश्वास बढ़ गया और मिंटू लाल को यह लगने लगा था कि अगली बार तो उनका चयन जरूर हो जाएगा। इसी बीच उन्होंने सिविल सेवा में अनिश्चितता को देखते हुए एक वैकल्पिक कैरियर के रूप में इतिहास से NET-JRF की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली। लेकिन सपना तो सपना होता है और अंततः 2018 की सिविल सेवा परीक्षा में मिंटू लाल को 664वीं रैंक प्राप्त हुई और भारतीय राजस्व सेवा- IRS आयकर के लिए उनका चयन हुआ। इस तरह मिंटू लाल ने जो सपना देखा था वो पूरा हो गया।

मिंटू लाल कहते हैं मुझे इस बात की खुशी है कि मेरा चयन सिविल सेवा में हो गया लेकिन इससे ज्यादा बड़ी बात यह है कि मेरे चयन के बाद से उनके क्षेत्र में लोगों का यह भ्रम दूर हो गया कि इसमें पैसे वाले लोग ही सफल हो सकते हैं। आज मिंटू लाल के गाँव से कई अन्य विद्यार्थी भी इस परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं और वो मिंटू लाल को अपनी प्रेरणा मानते हैं।

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