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साहस और संघर्ष की मिसाल, छोटे से गाँव के लड़के नवनीत सिकेरा का भौकाल, जो आज पूरी दुनिया देख रही है। आज जब वो कोरोना से जंग लड़ रहे हैं तो आइये जानते हैं उनके जीवन के इस लम्बे संघर्ष के बारे में…

सालों पहले जिसे 5 रूपये देकर उसके गाँव वापस जाने का मशवरा दिया गया था। आज उसी नवनीत सिकेरा का नाम देश के जाने माने पुलिस ऑफिसरों में शामिल हैं। गाँव के सीधे-साधे हिंदी मिडियम से पढ़े सिकेरा ने जीवन में अनन्य मुश्किलों का सामना किया। वे आज कामयाबी के शिखर पर हैं। उनके काम, ईमानदारी और दबंग अंदाज़ के चर्चे पूरे देश में मशहूर हैं।

IPS नवनीत सिकेरा
IPS Navniet Sekera

बहादुरी की मिसाल

अपने अदम्य साहस के लिए जाने जाने वाले लखनऊ के IG नवनीत सिकेरा, उत्तर प्रदेश के एटा में एक निम्न-मध्यम वर्ग के किसान परिवार में जन्में नवनीत सिकेरा को आज कौन नहीं जानता। आज जिनके व्यक्तित्व का दुनिया लोहा मानती है, उसी नवनीत सिकेरा को सालों पहले किसी ने 5 रूपये देकर बस में वापस बैठ उनके गाँव वापस लौट जाने की राय दी थी, क्योंकि उन्हें सिर्फ इंग्लिश नहीं आती थी। लेकिन वो सिकेरा के दृढ इरादे ही थे, जो वो लौटे नहीं और छोटे से गाँव से निकलकर अपने दम पर आज इतनी कामयाबी हासिल की।

शिक्षा और सिविल सेवा में चयन

यूपी के सरकारी स्कूल से पढ़कर आया लड़का जिसने इतनी मेहनत की, कि उसी ने आगे जाकर IIT प्रवेश परीक्षा को क्रैक किया। देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रुड़की में दाखिला लिया। जहाँ उन्होंने कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की।

उन्होंने अपने जीवन का लक्ष्य चुना और 1996 में भारतीय पुलिस सेवा में शामिल हुए। दो साल की कड़ी ट्रेनिंग के बाद, गोरखपुर के सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) के रूप में उन्हें अपनी पहली पोस्टिंग मिली। उसके बाद मेरठ में एएसपी का पद और 2001 में प्रोटोकॉल के अनुसार पुलिस अधीक्षक यानि (एसपी) के पद पर पदोन्नत किया गया। बतौर एसपी वो अपना काम बेहद ईमानदारी और बहादुरी से कर रहे थे। उसके बाद उनकी पोस्टिंग हुई मुजफ्फरनगर में, जहाँ पोस्टिंग मिलने पर उन दिनों सामान्यतः लोगों से पूछा जाता था आपको प्रमोट किया गया है या सज़ा सुनाई गयी है।

मुजफ्फरनगर में छाया ‘भौकाल’

मुज्जफरनगर पहुँचते ही नवनीत सिकेरा समझ गये यहाँ माफिया और अपराधियों का कुचक्र तेज़ गति से चल रहा है। नवनीत, जो हमेशा सच्चाई और कानून के हित के लिए काम करते आये थे, वो पीछे कैसे हटते। उन्होंने भी ठान लिया कि अब मुज्जफरनगर में माफिया के अंत का इतिहास उन्हें लिखना ही लिखना है। बस फिर क्या था, उन्होंने अपनी पूरी ताकत लगा दी। हालांकि इस काम को करने में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, उन्हें काफी परेशान किया गया, जिससे वो चले जाएँ या फिर माफिया से हाथ मिला लें। यहाँ तक की पुलिस डिपार्टमेंट से भी उन पर काफी प्रेशर बनाया गया।

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लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अन्याय के खिलाफ लड़ते रहे। अब यह तो निश्चित था कि मुज्जफरनगर को अपराधों की काली छाया से मुक्त कराना ही है। फिर चाहे जो हो जाए। जिसे दुनिया उस वक़्त सिरफिरा कह रही थी, उसी सिरफिरे ने माफिया के एक ऐसे अध्याय का अंत लिखा, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। वाकई, वह नवनीत सिकेरा का भौकाल ही था जिसकी दुनिया आज दीवानी है। उनके काम की सराहना और हौंसले की मिसाले आज ज़माने में दी जाती हैं। उनके काम करने के तरीके ने उन्हें इतना फेमस कर दिया कि आज हर युवा जो पुलिस में भर्ती होना चाहता है, वो नवनीत सिकेरा की तरह बनना चाहता है।

महिलाओं को पावरफुल बनाया

वर्तमान में, वह महिला पावर लाइन, उत्तर प्रदेश के महानिरीक्षक यानी आईजी हैं। सिकेरा ही वो व्यक्ति हैं जिन्होंने महिलाओं व बालिकाओं के सशक्तीकरण के लिये कार्य किया और ‘वुमन पावर लाइन 1090 की अवधारणा को विकसित और व्यवस्थित किया। जिसे 2012 में उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार ने शुरू किया था।

एनकाउंटर स्पेशलिस्ट जाबांज पुलिस अधिकारी नवनीत सिकेरा आधारित एक वेब सीरीज ‘भौकाल’ बनाई गई है। जिसमें सिकेरा द्वारा अपराध के विरुद्ध किये गए काम के साथ पुलिस की बदलती हुई छवि को दिखाया गया है। यह सिरीज उनके मुजफ्फरनगर कार्यकाल पर आधारित है। यह नवनीत सिकेरा के प्रयासों का ही परिणाम है कि आज मुजफ्फरनगर, जो एक अपराधों का गढ़ माना जाता था, आज वो एक शांत और व्यवस्थित जिले के रूप में पहचाना जाता है।

कोरोना से लड़ रहे हैं जंग

कोरोना काल में भी अपने काम और ज़िम्मेदारी को पूरी तरह निभाते हुए वे Covid-19 पॉजिटिव मिले हैं। जिसके बाद से उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया। वहाँ से भी वे बराबर सोशल मीडिया के माध्यम से सक्रिय नज़र आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर उनकी बहुत बड़ी फैन फॉलोइंग है। इस संकट की घड़ी में भी वे लोगों से सकारात्मक और प्रेरक बातें लगातार साझा कर रहे हैं। ऐसे साहसी और प्रेरक व्यक्तित्त्व को ईश्वर हर परिथिति से उबरने की शक्ति प्रदान करें। कोरोना पर वे ज़रूर विजय प्राप्त करेंगे।

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