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दोस्तों, आज हम जानेंगे राजस्थान के हनुमानगढ़ के ग्रामीण परिवार के आदित्य की सफलता के संघर्ष की प्रेरणादायक कहानी। जिन्होंने सरकारी स्कूल और हिंदी मीडियम से पढ़ाई करके अपने उस सपने को पूरा किया, जिसके बारे में हिंदी के छात्र कई बार यह सोचकर पीछे हट जाते हैं कि वो हिंदी माध्यम से हैं। लेकिन पढ़ाई में कमज़ोर होने और प्राथमिक शिक्षा का आधार भी हिला हुआ होने के बावजूद, आदित्य ने अपनी अथक मेहनत से वो मुक़ाम हासिल किया, जिसकी उन्हें चाह थी। आख़िरकार, वह सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण कर, IPS आदित्य कुमार बनने में सफल रहे।

तो आइये जानते हैं, उनके इस संघर्षपूर्ण सफर के बारे में और हमारा यह यकीन है कि इस कहानी को सुनने के बाद आपके अंदर भी निश्चित रूप से आत्मविश्वास की अद्भुत ऊर्जा का प्रवाह होगा जो आपके लक्ष्य को पाने में आपकी मदद करेगा।

संघर्ष से सँवरता है जीवन

संघर्ष से जीवन निखरता है, संवारता है व तराशा जाता है और फिर जिस सांचे में वो गढ़ा जाता है उसकी प्रशंसा करते जबान नहीं थकती। मेहनत हमें जीवन का अनुभव करती हैं, सतत रूप से सक्रिय बनाती है और हमें एक आदर्श जीवन जीना सिखाती है। संघर्ष के बल बूते न केवल हम आगे बढ़ते हैं, बल्कि जीवन जीने के सही अंदाज़ को – आनंद को अनुभव कर पाते हैं। दोस्तों याद रखिये जिस जीवन में संघर्ष नहीं, वहाँ सफलता हो होना नमुमकिन है और साथ ही प्रसन्नता व आनंद भी नहीं टिक पाते।

प्रारम्भिक शिक्षा

आदित्य राजस्थान के एक ग्रामीण परिवार से हैं और उनकी अधिकतर पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल में हुई है और बाद में उन्होंने B.A. और B.Ed. भादरा से किया। उनके माता-पिता दोनों शिक्षक हैं। कक्षा 11 के बाद उनके दोस्तों और परिवार के दबाव के कारण रुचि न होते हुए भी उन्हें गणित विषय चुनना पड़ा, परंतु उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं था और इसको देखते हुए उन्होंने आर्ट्स की दिशा में जाने का फैसला किया। और वो बताते हैं उनके इस फैसले के लिए उन्हें अक्सर लोगों की काफी बातों को सुनना पड़ता था। किन्तु उन्होंने स्वयं के निर्णय को सही साबित करने के लिए टाउन के ही निजी कॉलेज से BA किया और सिविल सर्विसेस की परीक्षा देने का फैसला किया।

चुनौतियों से मुकाबला

लेकिन सिर्फ सोच लेने मात्र से मंजिल नहीं मिल जाती। आदित्य ने तय तो कर लिया था की करना क्या है किन्तु इस सफर के मुश्किलों को जानना अभी बाकी था। शुरुआत की, तैयारी करने के दौरान अनगिनत चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिसमें सबसे बड़ी दिक्कत सारी पढ़ाई हिंदी मीडियम स्कूल से होने के कारण अंग्रेजी का कमजोर आधार उनके लिए गले की हड्डी थी। स्कूली शिक्षा में भी अधिक ध्यान न देने के कारण उनके बेसिक कमजोर थे। 2013 में पैटर्न चैंज होने के कारण हिंदी माध्यम में कंटेंट का अभाव था और इसके साथ नकारात्मकता का ये माहौल की 2013 में हिंदी माध्यम से सबसे कम लोगों का चयन हुआ था। एक अच्छे अखबार की कमी, गांवों में होने के करना एक सही गाइडेंस का अभाव भी एक प्रमुख कारण और समस्या थी।

हिंदी की समस्या को ऐसे किया दूर

IPS आदित्य कुमार कहते हैं 2014 से पहली बार उन्होंने अंग्रेजी अखबार पढना शुरू किया, तकनीक का उपयोग करना सीखा, जिसमें अनेक पोर्टल, वेबसाइट थी। 2014 से 2017 तक उन्होंने 4 बार प्रयास किया। जिसमें पहली बार में प्रारम्भिक परीक्षा में वो फेल हो गये थे। लेकिन फेल होने से उन्होंने हिम्मत नहीं हारी, अपनी कमजोरियों पर सुधार किया और दूसरी बार वो काफी उत्साहित थे, क्योंकि ना केवल प्रारम्भिक बल्कि मुख्य परीक्षा को प्रथम प्रयास में उन्होंने पास कर लिया और इंटरव्यू तक पहुँच गये थे, परंतु प्रथम साक्षात्कार में अनुभव की कमी और अभ्यास न होने पर बेहतर अंक नहीं मिले और अंततः असफलता हाथ लगी। तीसरे प्रयास में उन्होंने सोचा तो था कि बेहतर होगा, किन्तु भाग्य को कुछ और मंजूर था। वे मुख्य परीक्षा में असफल रहे, जिसका कारण था निबंध और इतिहास में कम अंक।

असफलता से टूटे पर बिखरे नहीं

अंदर से निराशा और इतने मानसिक दबाव का सामना उन्होंने पहले कभी नहीं किया था। आदित्य ने स्वयं को प्रेरित करने और अन्य विकल्प की तलाश में राजस्थान सिविल सेवा समेत कई सारे और पेपर दिए, परंतु असफलता का सफर निरंतर जारी रहा। वो कहते हैं माता-पिता के सहयोग, उनके दृढ़संकल्प और आत्मविश्वास से उन्होंने फिर चौथा प्रयास किया, लेकिन इस बार आदित्य ने अपनी कमियों को पूरा करने में कोई कमी नहीं छोड़ी और अत्याधिक मेहनत की और आखिरकार मेहनत रंग लाई। IPS आदित्य कुमार जिस सपने के पीछे सालों से मेहनत कर रहे थे वो सपना सच हो गया।

अपनी कमियों को पहचाना

IPS आदित्य कुमार कहते हैं कि इस परीक्षा की तैयारी के दौरान उनमे अनेक कमियां रही, जिसमें अधिक पढ़ने पर ध्यान देना बजाय रिवीज़न करना, लिखित अभ्यास में कमी, अति आत्मविश्वास, निबंध पर ध्यान न देना और वैकल्पिक विषय इतिहास में कमी और साक्षात्कार में ग्रुप मॉक पर अधिक ध्यान न देना, बोलने का अभ्यास न होना इत्यादि कई चीजों पर उन्होंने काम किया। और अपने इन सब अनुभवों के आधार पर उनकी हर एक युवा अभ्यर्थियों को सलाह रहती है कि बेसिक पर ध्यान दें, कंटेंट को सीमित रखें, समसामयिकी पर ध्यान दें और निरंतर अपडेट रहें। वैकल्पिक विषय का चुनाव अंकदायी, रुचि, समझ और उपलब्ध विषयवस्तु के आधार पर करें।

IPS Aditya Kumar

साक्षात्कार की तैयारी के लिए समूह चर्चा, मॉक इंटरव्यू पर ध्यान अवश्य दें। उनका कहना है इंटरव्यू में आत्मविश्वास की अहम् भूमिका होती है, अतः उन तत्वों पर अधिक ध्यान दें, जहाँ से आत्मविश्वास को सकारात्मक बल मिल सके और आपकी तैयारी का आधार सशक्त हो।

चोट से पत्थर और संघर्ष से जीवन निखरता है

जिस तरह बहते हुए पानी में पड़े पत्थर के आकार में पानी की धार धीरे-धीरे परिवर्तन कर देती है और कभी कभी इतनी सुंदर आकृति का रूप दे देती है कि लोग उसे मूरत के रूप में पूजने लगने हैं। उसी तरह हमारा जीवन भी संघर्ष की आग से निखरता है, आसमान की बुलंदियों को छूता है, हम मन चाहे लक्ष्य को प्राप्त करते हैं। और इसी प्रकार के संघर्ष की उपासना करने वाले आदित्य ने कई असफलताओं के बाद सफलता पाई। उन्होंने कभी भी असफलताओं के कारण निराश होकर हार नहीं मानी बस अपने परिश्रम की लड़ाई जारी रखी और सिविल सेवा परीक्षा 2017 से भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में चयनित होकर अपने लक्ष्य को प्राप्त किया और बन गए IPS आदित्य कुमार।

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